Ganesh Stotram

108 Names Of Lord Ganesha V3 in Sanskrit and Meaning | Ganapati, Vinayaka, Ganeshji, Gajanana

Ganesha Ashtottara Shatnamavali / Ganapati, Vinayaka, Ganeshji, Gajanana:

गजानन
गणाध्यक्ष
विघ्नराज
विनायक
द्वैमातुर
द्विमुख
प्रमुख
सुमुख
कृति
सुप्रदीप || 10 ||

सुखनिधी
सुराध्यक्ष
सुरारिघ्न
महागणपतयॆ
मान्याय
महाकाल
महाबला
हॆरम्ब
लम्बजठर
ह्रस्वग्रीव || 20 ||

महॊदरा
मदॊत्कट
महावीर
मन्त्रिणॆ
मङ्गल स्वरा
प्रमधा
प्रथम
प्रज्ञा
विघ्नकर्त्र
विघ्नहन्त्र || 30 ||

विश्व नॆत्र
विराट्पति
श्रीपति
वाक्पति
शृङ्गारिण
अश्रितवत्सल
शिवप्रिय
शीघ्रकारिण
शाश्वत
बल || 40 ||

बलॊत्थिताय
भवात्मजाय
पुराण पुरुष
पूष्णॆ
पुष्करॊत्षिप्त वारिणॆ
अग्रगण्याय
अग्रपूज्याय
अग्रगामिनॆ
मन्त्रकृतॆ
चामीकरप्रभाय || 50 ||

सर्वाय
सर्वॊपास्याय
सर्व कर्त्रॆ
सर्वनॆत्रॆ
सर्वसिद्धिप्रदाय
सिद्धयॆ
पञ्चहस्ताय
पार्वतीनन्दनाय
प्रभवॆ
कुमारगुरवॆ || 60 ||

अक्षॊभ्याय
कुञ्जरासुर भञ्जनाय
प्रमॊदाय
मॊदकप्रियाय
कान्तिमतॆ
धृतिमतॆ
कामिनॆ
कपित्थपनसप्रियाय
ब्रह्मचारिणॆ
ब्रह्मरूपिणॆ || 70 ||

ब्रह्मविद्यादि दानभुवॆ
जिष्णवॆ
विष्णुप्रियाय
भक्त जीविताय
जितमन्मधाय
ऐश्वर्यकारणाय
ज्यायसॆ
यक्षकिन्नेर सॆविताय
गङ्गा सुताय
गणाधीशाय || 80 ||

गम्भीर निनदाय
वटवॆ
अभीष्टवरदाय
ज्यॊतिषॆ
भक्तनिधयॆ
भावगम्याय
मङ्गलप्रदाय
अव्यक्ताय
अप्राकृत पराक्रमाय
सत्यधर्मिणॆ || 90 ||

सखयॆ
सरसाम्बुनिधयॆ
महॆशाय
दिव्याङ्गाय
मणिकिङ्किणी मॆखालाय
समस्त दॆवता मूर्तयॆ
सहिष्णवॆ
सततॊत्थिताय
विघातकारिणॆ
विश्वग्दृशॆ || 100 ||

विश्वरक्षाकृतॆ
कल्याणगुरवॆ
उन्मत्तवॆषाय
अपराजितॆ
समस्त जगदाधाराय
सर्वैश्वर्यप्रदाय
आक्रान्त चिद चित्प्रभवॆ
श्री विघ्नॆश्वराय || 108 ||